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Thursday, 23 June 2016

चिंपूजी की शादी (बाल-गीत)

 एक सहकर्मी के आग्रह पर उनके बेटे के लिए लिखी गई कविता
    
          ‍‍- चिंपूजी की शादी (बाल-गीत) -

एक पेड़ पर रहते थे एक बंदरिया और बंदरजी
कुछ दिन बीते पैदा हो गए उनके छोटे चिंपूजी॥

मम्मी- पापा का लाड़ पा चिंपूजी हो गए बड़े शैतान
दिन भर धमाचौकड़ी करते, छोडें न कोई पेड़-मकान ॥

बंदरिया ने कहा एक दिन कहा करेंगे तुमको पाजी
बंदर ने कहा सुधर जाओ तो कहा करेंगे राजाजी ॥

चिंपूजी बोले सुधर जाऊँगा मम्मीजी और पापाजी
शर्त यही है ला दो एक दुल्हनिया मेरे लिए छोटीजी ॥

बंदर-बंदरिया ने कई जगह फिर शादी की बात चलाई
पर हर वानर-वानरी बोले, लड़का  दुष्ट बहुत है भाई ॥

बंदर और बंदरिया के पास आए एक सूटेड-बूटेड दम्पति
हैट उतार कर बोले मैं हूँ मिस्टर मंकी, ये है मिसेज मंकी ॥

हमारी बिटिया बी ए यानी बड़ी एक्सपर्ट, हो चुकी सयानी
शादी कर देंगे चिम्पू से, शर्त है आप बना कर रखें  रानी ॥

बंदर-बंदरिया बोले आपकी बेटी हुई हमारी,भर दी हामी
बैंड-बाजे संग चली बारात,नाचे बिल्ली मौसी कुत्ता टामी ॥

बारात लौटी तब दुल्हनिया को चिंंपूजी ने काटी चुटकी
दुल्हनिया चीखी- खौं-खौं ,दूल्हा चिंपू लगता है सनकी ॥

मैं जा रही हूँ तुरंत मायके अपने मम्मी-पापा के पास
जब तक नहीं सुधरेगा चिंपू,डालूँगी न मैं इसको घास ॥
      -संजय त्रिपाठी


Monday, 6 June 2016

आसमां पे बादलों का पहरा (गजल)





















आसमां पे बादलों का पहरा बैठा हुआ है
पर बेखबर शहर अभी सोया हुआ है।।

कलेजे में ठंडक लिए आ गए हैं मेहमां
जिनके आगोश में जहाँ सिमटा हुआ है।।

तपन और उमस से हर शख्स परेशां था
सहला रही है मौजे नसीम ये किसकी दुआ है।।

चले न जाएं दिल को सुकूँ देने वाले यायावर
रोकना आसमां पे कारवाँ जो ठहरा हुआ है।।

गमकने लगी धरती फिर से लिए सोंधी महक
गिरती अमृत की बूँद ने उसे छू क्या लिया है।।

तान कर हिफाजत के लिए बरसाती चादर
धरती के दामन में गरीब दुबका हुआ है।।

 देख श्याम मेघ छटा दिल में लिए उल्लास
नाचता कवि मन 'संजय' आज मोर हुआ है।।
   - संजय त्रिपाठी