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Saturday, 23 August 2014

उनको तो हर तरफ रकीब दिखाई देते हैं (गजल)


                                                                   गजल

( यह गजल मेरे मित्र विक्रम सिंह जी की सपत्नीक उजबेकिस्तान यात्रा पर आधारित है )

उनको तो हर तरफ रकीब दिखाई  देते हैं
पर हमको वो खुशनसीब दिखाई देते हैं    ॥

रश्क क्यूँ न करे ये दुनिया तुम पे ऐ दोस्त
जब यूँ वो तुम्हारे करीब दिखाई देते हैं  ॥

जब भी जेहन में उठने लगते हैं चंद सवाल
उनके चेहरे ही हमें मुजीब दिखाई देते हैं॥

उजबेकों के बीच राजा-रानी हिंदुस्तानी
कुछ वाकये बेहद अजीब दिखाई देते हैं  ॥ 

जिस वतन में भी मिल जाएं अदबनवाज
वहीं हमें लोग लिए  तहजीब दिखाई देते हैं ॥

नायाबों की महफिल में कहाँ जाएं "संजय"
यूँ भी हम आदमी बेतरतीब दिखाई देते हैं ॥
                                                                 -संजय त्रिपाठी